डॉ. अंबेडकर भारतीय संविधान के प्रमुख वास्तुकार थे और संविधान सभा की मसौदा समिति के अध्यक्ष थे।

2. दलितों के अधिकारों के लिए संघर्ष – उन्होंने दलितों (अस्पृश्यों) के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया और उन्हें सामाजिक बराबरी दिलाने की कोशिश की।

3. पहले कानून मंत्री – आज़ादी के बाद भारत के पहले कानून मंत्री के रूप में उन्होंने कार्य किया।

4. शिक्षा के प्रति समर्पण – उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय (अमेरिका) और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उच्च शिक्षा प्राप्त की। वे भारत के सबसे शिक्षित व्यक्तियों में से एक थे।

5. जाति व्यवस्था के खिलाफ आवाज – अंबेडकर ने भारतीय समाज में व्याप्त जाति व्यवस्था और छुआछूत का कड़ा विरोध किया।

 बौद्ध धर्म की दीक्षा – उन्होंने 14 अक्टूबर 1956 को लाखों अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया, जिससे नव बौद्ध आंदोलन की शुरुआत हुई।

 ‘अनुसूचित जाति संघ’ की स्थापना – 1930 में उन्होंने दलितों के हितों की रक्षा के लिए इस संगठन की स्थापना की।

10. महापुरुष और प्रेरणा स्रोत – आज भी वे करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा हैं और सामाजिक न्याय के प्रतीक माने जाते हैं।